जामगांव आर - के समीपस्थ ग्राम बोरवाय में श्री राम कथा मानस गान प्रतियोगिता का आयोजन किया गया, समापन दिवस के अवसर पर पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के प्रतिनिधि के रूप में क्षेत्र के जिला पंचायत सदस्य एवं दुर्ग जिला पंचायत के उपाध्यक्ष अशोक का साहू, एवं कार्यक्रम के अध्यक्षता रूपचंद साहू, विशेष अतिथि के रूप में मेहत्तर राम वर्मा अध्यक्ष जिला मानस संघ दुर्ग, रूपेंद्र शुक्ला महामंत्री जिला कांग्रेस कमेटी दुर्ग, ग्राम बोरवाय के सरपंच भूषण साहू , भिखमनी चन्द्राकर पूर्व सरपंच ग्राम बोरवाय ने किया। 


पुरुष वर्ग में प्रथम स्थान - सरस्वती मानस परिवार ग्राम कपसदा को प्राप्त किया, मंडली के व्याख्याकार के रूप में आचार्य श्री पिला राम शर्मा  ने श्री राम चरित मानस की कथा कही।*

महिला वर्ग में प्रथम स्थान - जय माँ सरस्वती मानस परिवार हतखोज भिलाई -02 को प्राप्त हुआ।


कार्यक्रम के मुख्य अतिथि अशोक साहू ने कहा कि - रामचरित मानस तुलसीदासजी का सुदृढ़ कीर्ति स्तंभ है जिसके कारण वे संसार में श्रेष्ठ कवि के रूप में जाने जाते है, क्योंकि मानस का कथाशिल्प, काव्यरूप, अलंकार संयोजना, छंद नियोजना और उसका प्रयोगात्मक सौंदर्य, लोक-संस्कृति तथा जीवन-मूल्यों का मनोवैज्ञानिक पक्ष अपने श्रेष्ठ रूप में है। मुक्ति और भक्ति व्यक्तिगत वस्तुएं हैं। तुलसीदास की लोकप्रियता का कारण यह है कि उन्होंने अपनी कविता में अपने देखे हुए जीवन का बहुत गहरा और व्यापक चित्रण किया है। उन्होंने राम के परंपरा-प्राप्त रूप को अपने युग के अनुरूप बनाया है। उन्होंने राम की संघर्ष-कथा को अपने समकालीन समाज और अपने जीवन की संघर्ष-कथा के आलोक में देखा है। उन्होंने वाल्मीकि और भवभूति के राम को पुन: स्थापित ही नहीं किया है बल्कि अपने युग के नायक राम को चित्रित किया है।


जिला पंचायत उपाध्यक्ष श्री साहू ने आगे कहा कि - रामचरित मानस गोस्वामी तुलसी जी महाराज की उदारता, अंत:करण की विशालता एवं भारतीय चारित्रिक आदर्श की साकार प्रतिमा है। तुलसी ने राम के रूप में भारतीय संस्कृति एवं सभ्यता की ऐसी आदर्शमयी ओर जीवंत प्रतिमा प्रतिष्ठित की है, जो विश्वभर में अलौकिक, असाधारण, अनुपम एवं अद्भुत है, जो धर्म एवं नैतिकता की दृष्टि से सर्वोपरि है।


कार्यक्रम के अध्यक्षता कर रहे रूपचंद साहू क्षेत्रीय जनपद  सदस्य व सभापति जनपद पंचायत पाटन ने कहा कि - रामचरित मानस की रचना भले ही तुलसीदास ने स्वांत: सुखाय के हेतु की हो लेकिन तुलसी का वह स्वांत: सुखाय विश्व साहित्य तथा विश्व जन का ही स्वांत: सुखाय के रूप में देखा जाता है, जो उनके अंतस्करण में निरंतर निवास करने वाले प्रभु श्रीराम के अंतस्करण के साथ एकाकार हो गया है। तुलसीदास ऐसे संवेदनशील महाकवि हैं, जो रामचरित मानस जैसी महान कृति का उद्घाटन करने में सफल सिद्ध होते हैं। रामचरित मानस ऐसी लोकग्राह्य कृति है जिसमें समाज के लगभग हर एक वर्ग के रेखांकन की सूक्ष्मता को अत्यंत पैनी एवं गंभीर दृष्टि से देखा जा सकता है।


कार्यक्रम के मुख्य निर्णायक व मानस मर्मज्ञ अश्वनी साहू पूर्व अध्यक्ष कृषि उपज मंडी दुर्ग ने कहा कि - राम का मानवीय व्यवहार सबको लुभाता है, आश्चर्य में डालता है। राम आदर्श भाई, आदर्श मित्र, आदर्श पति और आदर्श दुश्मन भी हैं। तुलसी की लोक-साधना ऊपर से देखने में भले ही भक्तिपरक लगती है, पर उनके भीतर के आदर्श समाज का सपना एक आदर्श मानव का चरित्र है। वस्तुत: तुलसी के राम वस्तुत: एक हैं। वे ही निर्गुण और सगुण, निराकार और साकार, अव्यक्त और व्यक्त, अंतरयामी और बहिर्यामी, गुणातीत और गुणाश्रय हैं। निर्गुण राम ही भक्तों के प्रेमवश सगुण रूप में प्रकट होते हैं। राम का रामत्व उनकी संघर्षशीलता में है, न कि देवत्व में। राम के संघर्ष से साधारण जनता को एक नई शक्ति मिलती है। कभी न हारने वाला मन, विपत्तियां हजार हैं, लक्ष्मण को ‘शक्ति’ लगी है, पत्नी दुश्मनों के घेरे में है, राम रोते हैं, बिलखते हैं, पर हिम्मत नहीं हारते हैं।


निर्णायक चम्पालाल साहू जी ने कहा कि - मानस के अंतस में एक निर्णायक संघर्ष का विन्यास है, जो ऊपर के बजबजाते पानी के शोर में सुनाई नहीं देता। मानस में अंतरगुम्फित यह संघर्ष बेजोड़ है और बेजोड़ है तुलसी का रण-कौशल। यह संघर्ष है- मर्यादा और अमर्यादा के बीच, शुद्ध और अशुद्ध भावना व विचार के बीच, सहज और प्रपंची भक्ति के बीच, सरल और जटिल जीवन-दर्शन के बीच। ‘मानस’ कोरे आदर्श को स्थापित करने वाला ग्रंथ नहीं है। यहां राम के साथ रावण भी है। सीता के साथ मंथरा भी है। तुलसी संपूर्ण समाज को एकसाथ चित्रित करते हैं, यही राम चरित मानस की विशेषता हैं।


इस अवसर पर निर्णायक अश्वनी साहू पूर्व अध्यक्ष कृषि उपज मंडी दुर्ग, देशमुख , चम्पालाल साहू मुख्य रूप से उपस्थित रहे कार्यक्रम का मंच संचालन योगेश चन्द्राकर, पुनेश्वर साहू, ने किया, इस अवसर पर समिति के संरक्षक दाऊ रामगोपाल चन्द्राकर, अनिल चन्द्राकर, समिति के अध्यक्ष दाऊ संतोष चन्द्राकर,  संचालक / निर्देशक योगेश चन्द्राकर, चन्द्रशेखर देवांगन, जय प्रकाश चन्द्राकर पूर्व जिला पंचायत सदस्य दुर्ग, दाऊ युवराज चन्द्राकर, सेवक राम साहू, ईश्वर चन्द्राकर, दयाराम चन्द्राकर गीतेश्वर देवांगन, बेनु राम कामरे, गन्नू साहू, भेल चन्द्राकर (शिक्षक), बाबू तुषार कामरे, दुर्गा प्रसाद यादव, हरि लाल साहू, खिलेश साहू, एमन कुमार साहू, राधेश्याम टंडन,  ईश्वर जोशी, भागवत साहू, देवेंद्र चन्द्राकर, डालेश्वर साहू, लुकेश्वर साहू, पवन कुमार डहरे, नारद डहरे, मोरजध्वज साहू, दयालू साहू, एमन कुमार साहू, सौरभ कामरे, भूषण साहू, संतोष साहू, युगल साहू, पोषण चन्द्राकर, चुनेश साहू, लाला राम गुरूपरख, होलकर साहू, केशु राम साहू, रूप लाल साहू, युगल किशोर साहू, हर प्रसाद साहू, विक्रम जोशी, भारत साहू, रोशन साहू, सुनील साहू, दूधनाथ यादव, सहित ग्राम वासी उपस्थित रहे।