छत्तीसगढ़ में इस समय राजनीतिक सरगर्मियां तेज हैं विभिन्न राष्ट्रीय दलों ने अपनी-अपनी राजनीतिक बिसात धरातल पर बिछा रही है।छत्तीसगढ़ के 90 विधानसभा सीटों पर उम्मीदवारी की मंथन एवं घोषणा भी पार्टियों के लिए टेढ़ीखीर बनी हुई है!जिन विधानसभा सीटों पर उम्मीदवार घोषित हुए हैं सरसरी निगाह डाले तो देखने मे आया कि राष्ट्रीय दल जो अपने आप को छत्तीसगढ़ में छत्तीसगढिया वादी बताते आ रहे हैं उन्हीं राजनीतिक पार्टीयों द्वारा परप्रांतियों को अपना उम्मीदवार घोषित कर रहे हैं!अब इन पार्टियों पर प्रश्नचिन्ह खड़े हो रहे हैं कि इन पार्टियों के लिए "छत्तीसगढिया वाद" की परिभाषा क्या है???
छत्तीसगढ़ में "छत्तीसगढिया वाद" के जनक कहे जाने वाली गैर राजनीतिक संगठन छत्तीसगढिया क्रान्ति सेना विभिन्न पार्टियों द्वारा परप्रान्ती (गैर छत्तीसगढिया) लोगों को टिकिट देने के विरोध में स्वर मुखर की है।
छत्तीसगढ़ियों का हक मारना बंद करे राजनीतिक पार्टियां--राहुल वर्मा(जिला प्रभारी बालोद)
अपने बालोद प्रवास के दौरान मीडिया से मुखातिब राहुल वर्मा ने कहा कि राष्ट्रीय पार्टियां परप्रांतियों को राजनीति में जगह देकर उन्हें फलने-फूलने का मौका देकर छत्तीसगढ़ को "मिनी इंडिया"के रूप में फलीभूत कर रही है जो यहां के मूल निवासियों के प्रति संवेदनहीनता और असंवैधानिक नीति को दर्शाता है।
मूल छत्तीसगढिया समाज को तय करना है आप किसके साथ हैं---शशिभूषण चंद्राकर,जिला संयोजक छत्तीसगढिया क्रान्ति सेना
23 बरस के छत्तीसगढ़ में हमने देखा है कि हमारे मूल अधिकारों को परदेसिया वादी ताकतों ने दबाया है इसमें कोई संदेह नहीं रहा है।आज भी बालोद जिले के विधानसभा सीट पर गैर छत्तीसगढिया समाज बाहिरि यादव को टिकिट देकर पार्टी के द्वारा परदेसिया वादी ताकत को बढ़ावा दे रही है।हमने देखा है छत्तीसगढ़ की राजनीति में परप्रांतीय सदैव अपने समाज को बढ़ाने का और मूल छत्तीसगढिया समाज को दबाने का काम किया है।
गैर छत्तीसगढियों को चुनाव में हराने काम करेगी सेना---चंद्रभान साहू,जिला सह संयोजक
आज पूरे छत्तीसगढ़ में छत्तीसगढिया क्रान्ति सेना राजनीति में सौ फीसद छत्तीसगढिया आरक्षण को बल देती है किंतु राजनीतिक पार्टियां इसके उलट परदेसिया तंत्र को बढ़ावा दे रही है!अब जो भी गैर छत्तीसगढिया उम्मीदवार चुनाव लड़ेगा उसे हराने का काम छत्तीसगढिया क्रान्ति सेना बड़ी शिद्दत से करेगी।

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