गुरुर- छत्तीसगढ़िया क्रांति सेना ब्लाक संयोजक गुरुर झम्मन हिरवानी ने प्रदेश वासियों को कृष्ण जन्मआष्ट्मी पर्व की बधाई देते हुए कहा कि श्री कृष्णा लीला भक्ति और प्रेम का संगम को दर्शाता है हर साल कृष्ण जन्माष्टमी के अगले दिन दही हांडी का उत्सव धूमधाम से मनाया जाता है. इसमें गोविंदा ऊपर लटके हुए मटकी को फोड़ते हैं. दही हांडी उत्सव कृष्ण की बाल लीला का प्रतिकात्मक रूप है.श्रीकृष्ण बचपन में बहुत ही शरारती थे. इसलिए उन्हें नटखट गोपाल भी कहा जाता था. कृष्ण के बाल्याकाल से कई लीलाएं जुड़ी हैं, इन्हीं में एक है मटकी तोड़कर माखन चुराना. धार्मिक कथाओं के अनुसार, श्रीकृष्ण बचपन में पड़ोस के घरों की मटकी फोड़कर माखन चुराया करते थे. इसलिए उनका एक नाम माखनचोर भी पड़ा. भगवान श्रीकृष्ण की इसी बाल लील को सामने रखने या दर्शाने के लिए हर साल जन्माष्टमी के बाद दही हंडी का उत्सव मनाया जाता है l
उन्होंने कहा कि जन्माष्टमी में दही हांडी उत्सव का विशेष महत्व है. क्योंकि यह भगवान श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं का अभिन्न और प्रमुख हिस्सा है, जिसे प्रतीकात्मक रूप में दर्शाने के लिए दही हांडी का उत्सव मनाया जाता है. मान्यता है कि, जिस घर में माखन चोरी के लिए मटकी फोड़ी जाती है वहां कभी दुखों का वास नहीं होता और घर खुशियों से भर जाता है.

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